मालगोदाम और माथुर फॊर्म से पेड़ काटने के मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त
आगरा। आगरा के दयालबाग क्षेत्र स्थित माथुर फॊर्म हाउस से 17 पेड़ काटे जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सीईसी की अनुशंसाएं स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि फॊर्म हाउस मालिक फार्म में उसी जगह पर 17 पेड़ लगाए जहां से ये काटे गये थे। 17 लाख के जुर्माने को जारी रखते हुए काटे हुए पेड़ों के बदले 20 गुना (340) पेड़ लगाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने का भी आदेश दिया।

-मालगोदाम के मामले में गणपति बिल्डर की दोनों कंपनियों और रेल लैंड डेवलपमेंट अथॊरिटी को नोटिस जारी
-माथुर फॊर्म में 17 पेड़ लगाने होंगे, 20 गुना पेड़ लगाने के लिए जमीन देनी होगी, जुर्माना भी बरकरार रखा
ताज ट्रिपेजियम जोन में लगातार हरे पेड़ों की कटाई को लेकर आगरा के पर्यावरणविद डॊ. शरद गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की हुई हैं। माथुर फार्म हाउस और गधापाड़ा स्थित रेलवे मालगोदाम परिसर में पेड़ काटे जाने के मामले भी डॊ. शरद गुप्ता ही सुप्रीम कोर्ट में लेकर पहुंचे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इन दोनों मामलों पर सुनवाई की। दयालबाग स्थित माथुर फॊर्म हाउस से 17 पेड़ काटे जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीईसी (सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी) की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए फॊर्म हाउस मालिक को उपरोक्त आदेश दिए। फॊर्म हाउस मालिक का प्रति पेड़ एक लाख रुपये जुर्माना माफ किए जाने का अनुरोध कोर्ट ने नहीं माना। आदेश दिया कि माथुर फॊर्म हाउस में उसी जगह पर 17 पेड़ लगाएं जहां से पहले पेड़ काटे गये थे।
इसके साथ ही 17 काटे गये पेड़ों के एवज में 20 गुना वृक्ष लगाने के लिए वन विभाग को जमीन उपलब्ध कराएं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 17 पेड़ों के बदले जिस जमीन पर 340 पौधे लगाए जाएंगे, वह रिजर्व फॊरेस्ट रहेगा। सर्वोच्च अदालत ने यह भी आदेश दिया कि 340 पेड़ों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली जमीन के मामले में यमुना के डूब क्षेत्र संबंधी नियम भी लागू रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने आगरा में बेलनगंज के गधापाड़ा स्थित रेलवे मालगोदाम परिसर से हरे पेड़ों को काटे जाने के मामले में भी सख्त रुख अपनाया। सीईसी की रिपोर्ट पर इस मामले का संज्ञान लेते हुए मालगोदाम की जमीन को खरीदने वाले आगरा के गणपति बिल्डर्स की दोनों कंपनियों के साथ ही जमीन की बिक्री करने वाली रेल लैंड डेवलपमेंट अथॊरिटी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि ठेकेदार ने मालगोदाम से पेड़ काटे हैं।
मालगोदाम की जमीन पर होगा सिटी फॊरेस्ट?
रेलवे मालगोदाम से काटे गये पेड़ों के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने अगर माथुर फॊर्म हाउस जैसा ही आदेश जारी किया तो गणपति बिल्डर को मालगोदाम परिसर में ही काटे गये पेड़ों के अलावा 20 गुना पेड़ ( दो हजार से ज्यादा) वृक्ष लगाने पड़ेंगे। इसके साथ ही प्रति पेड़ एक लाख रुपये के हिसाब से एक करोड़ रुपये से अधिक जुर्माना भी अदा करना पड़ेगा। याचिकाकर्ता डॊ. शरद गुप्ता ने भी मामले की सुनवाई के दौरान सीईसी से अनुरोध किया था कि मालगोदाम में वृक्षारोपण कराकर इसे सिटी फॊरेस्ट घोषित किया जाए।
अब देखना यह है कि गणपति बिल्डर और रेल लैंड डेवलपमेंट अथॊरिटी इस मामले में क्या जवाब दाखिल करते हैं और सुप्रीम कोर्ट का क्या आदेश आता है।